तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे बलिहार राघव जी…

*रामकथा में सीताराम विवाह प्रसंग सुनाकर राजन जी महाराज ने श्रोताओं को आनंदित किया*

अरुण पाठक

बोकारो : श्रीराम कथा आयोजन समिति, बोकारो के तत्वावधान में सेक्टर 4 मजदूर मैदान में चल रहे श्रीराम कथा के छठे दिन कथावाचक राजन जी महाराज ने सीताराम विवाह प्रसंग पर सुनाकर श्रोताओं को आनंदित किया। इस क्रम में उन्होंने तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे बलिहार राघव जी… सहित अन्य भजन सुनाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि कृपा दिखाई नहीं देती है अनुभव की जाती है। जीवन में कोई कार्य करिए तो पहले श्रेष्ठ का आशीर्वाद जरूर लीजिए।

राजन जी महाराज ने विवाह प्रसंग की चर्चा के क्रम में कहा कि जब अयोध्याजी से श्री राम जी की बारात जनकपुर के लिए निकली तो बारात ऐसी झूमी कि दिन और रात का अंतर समाप्त हो गया। जनकपुर ऐसे सजी की स्वयं जगत रचयिता ब्रह्मा जी भ्रम में पड़ गए कि यह जनकपुर तो मैने नहीं रचा। उन्हें खुद की रचना में ही संदेह हो गया। इतने सुंदर बाराती और बाराती से भी सुंदर सराती का अद्भुत संयोग पर्व था श्री सीताराम विवाह।

व्यवस्था के लिए राजा जनक के लोग कम न थे लेकिन राजा दशरथ के लोग भी उनका सहयोग करने के लिए खड़े थे, ऐसी थी हमारी बारात व्यवस्था।अभी का हाल देखिए। बराती जाएंगे तो दुल्हन के घर में तबाही मचाएंगे। आश्चर्य तो यह कि कभी कभी कोई कोई बाराती नशे में इतना धुत्त होकर शादी ब्याह में जाता है कि ले जाने वाला भी शर्मिंदा हो जाये और जिनके घर लेकर गया है उनका तो भगवान ही मालिक है। दुल्हन के घर अगर छोटी मोटी अब्यवस्था रह भी जाये तो उन्हें सहयोग का स्वभाव बनाइये न कि उसे निंदा का अवसर समझिए।

कोई भी पिता माता और परिवार जब अपने बच्चों का विवाह तय करते है तो यह सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं कि सबकुछ व्यवस्था हो जाये लेकिन व्यवस्था सामर्थ्य और परिस्थिति के वश होता है इसलिए अगर कुछ चूक भी रह जाये तो उसे भूलने का भाव बनाइये।

विवाह प्रसंग के बीच बीच में जो भजन उनके संगीत दल के द्वारा गाये गए सभी का आंनद बोकारो के श्रोताओं ने झूम कर लिया।लाल पीली साड़िया पहनकर महिला श्रोता जहाँ झूमती गाती रहीं वही अधिकांश पुरुष रंगीन कुर्ते पजामें में दिखे। श्री राजन जी ने महाराज ने जहाँ एक ओर विवाह प्रसंग से सबको झुमाया वहीं उनके भजनों ने ऐसा समां बांधा कि लगा सारे श्रोता जनकपुर के जनवासे से नाचते गाते जा रहे हैं।

हज़ारो की संख्या और खचाखच भरे पंडाल को देखकर एक और जहां आयोजन समिति कृतार्थ का अनुभव कर रही थी वही राजन जी महाराज ने इसे बोकारो की जनता का प्रभु श्री राम के प्रति अनुराग का भाव बताया एवं सभी को ऐसे ही सदा बने रहने का आह्वाहन किया।

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